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लिटेररी वॉरियर्स ग्रुप ने मनाया ऑनलाइन रंगा रंग संगीत कार्यक्रम

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NANDED TODAY:26,May,2021 ( सरिता त्रिपाठी लखनऊ, उत्तर प्रदेश ) लिटेररी वॉरियर्स ग्रुप ने मनाया ऑनलाइन रंगा रंग संगीत कार्यक्रम मशहूर लेखिका, कवयित्री, शायरा, लिम्का बुक अवार्ड से सम्मानित नीलम सक्सेना जी के फेसबुक पेज से आप सभी बखूबी परिचित हैं, जिस पर सप्ताह में अनेको लाइव काव्य पाठ और गोष्ठियाँ आयोजित होती रहती हैं। उसी ग्रुप से जुड़े लोगों का एक व्हाट्सएप समूह भी है, जिसमें देश विदेश से अनेको लोग जुड़े हुए हैं।

समूह के लोगों का एक मासिक जूम मीटिंग रखी जाती है, और वहाँ सब अलग ही मस्ती का आनन्द उठाते हैं जो की प्रसारित नहीं हो रहा होता है। एक दूसरे की बाँडिंग भी देखने को मिलती है, तो कल की मीटिंग मई माह की मीटिंग थी और यह मीटिंग गर्लस् विशेषांक थी, जिसमें सभी जुड़े पात्र सिर्फ महिलाएं/लड़कियाँ थी। मीटिंग की इस मस्ती में शामिल हुए लोग थे,

नीलम जी, सुरेखा जी, अंजली जी, अलका जी, अपर्णा जी, रेणु जी, वहीदा जी, मनीषा जी, पारुल जी व सरिता जी, जो कि देश के भिन्न भिन्न प्रांत से जुड़े हुए थे। तो बताना चाहूँगी कि आज के इस जुड़ाव में हमारा एक विशिष्ट मेहमान भी था और इस मिलन का एक विशिष्ट नाम भी रखा गया था, तो अनुमान लगाइये ऐसा क्या विशेष था।

जी हाँ दोस्तों यह समूह हम सबका परिवार है और हम एक दूसरे से आत्मिक रूप से ऐसे जुड़ गये हैं कि हर किसी का सुख दुःख अपना हो गया है। तो हमारे समूह की एक चहेती हैं अल्का जी जिन्हें हम प्यार से ऐनी बुलाते हैं, जो देखने में प्यारी सी गुड़िया लगती हैं, गोलू मोलू सी, उम्र तो जैसे उन्हें छूना ही भूल गयी और वह अपने युवा अवस्था में ठहर सी गयी है। जी हाँ हमारी कोयल सी कोकिला ऐनी जी की वाणी भी उन्हें एक बच्चा ही समझती है और सुरीले कंठ से सबको भ्रमित कर देती है।

तो दोस्तों हमारी ऐनी जी सासु माँ बन गयी हैं इसी हफ्ते इनके बेटे की शादी थी और आज की विशिष्ट मेहमान हम सबकी प्यारी बहु मोनिका डार्लिंग थी। कुछ कुछ आगे भी समझ आ ही गया होगा आप सभी को जैसा कि मैंने कहा कि आज के मिलन का विशेष नाम भी था, हाँ तो यही था नाम ‘मुख दिखाई’ जो कि हमारे भारतीय समाज में शादी के बाद का एक रिवाज है।

तो आज के इस विषम परिस्थिति में जब हम सभी किसी कार्यक्रम में सशरीर उपस्तिथि नहीं दर्ज करा पा रहे हैं, इस नेटवर्क की दुनिया ने अपनों को पास लाने में बड़ी मदद की है, उसी नेटवर्क से वर्चुअली जुड़कर आज हम सभी ने उस परम्परा को निभाने में सफलता प्राप्त की।

“आज की शाम सुकून भरी गुजरी
दिल को खुशनुमा कर गयी
बहु की मुख दिखायी रस्म
महफ़िल में चार चाँद लगा गयी”

हम सभी का प्लान था कि आज कुछ संगीत का आनन्द लिया जाय और सभी को कुछ गुनगुनाना था चाहे वह लोकगीत हो, फ़िल्मी गीत हो या अपने लिखे नज्म हों। तो इस सिलसिले की शुरुवात अपर्णा जी ने बधाई गीत गाकर किया और बहु के आगमन का जोरदार स्वागत हुआ। मनीषा जी ने बहुत सुरीली आवाज और लय में भोजपुरी गीत को गाया- ‘हाथ में मेहंदी माँग सेंदुरवा, बर्बाद कजरवा हो गईला हो’। पारुल जो कि एक जानी मानी गायिका हैं

अपने सुरों से सबको सम्मोहित कर लेती हैं, उनकी आवाज से महफ़िल में नया रंग जम गया। रेणु जीजी ने ‘रात कली एक ख्वाब में आयी और गले का हार हुई’ एवं वहीदा जी ने बहुत ही मनमोहक गाया और ऐसा बिल्कुल नहीं है कि ये दोनों लोग गाते ही नहीं है। सुरेखा जी, अंजलि जी ने अपने लिखे हुए नज्मों को बहुत ही सुन्दर ढंग से प्रस्तुत किया। सरिता जी ने भी लोकगीत प्रस्तुत किया,

नीलम जी भी बीच बीच में गुनगुनाती रही और हाँ आज की हमारी सासु माँ अल्का जी ने अपने सुरीले कंठ से सुरीला गान गा करके शमा को रोशन कर दिया। अंत में मनीषा जी ने अपनि गीत ‘नहीं नहीं जाना नहीं, अभी नहीं जाना नहीं’ की प्रस्तुति देकर सभी को विदा किया, और ऐसे ही कार्यक्रम को अगले महीने कुछ नये अंदाज में लाने का वादा किया है। तो हाँ दोस्तों इंतज़ार करिये हमारे नये गपशप का तब तक के लिए पढ़े आनंद ले अपना खयाल रखे स्वस्थ रहे।

मस्तियों में हमारे आप भी शामिल हो
गोष्ठियों में आकर आप भी आनंदित हो
स्वागत रहेगा सदा आपका फेसबुक पेज पे
पर आपके जो विचार मिलें मर्यादित हो
सरिता त्रिपाठी
लखनऊ, उत्तर प्रदेश

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