تم القبض على راجيش باندي لبيعه ألفي لقاح مزيفراجیش پانڈے کو دو ہزار جعلی ویکسین فروخت کرنے کے الزام میں گرفتار کیا گیا दो हज़ार नक़ली वैक्सीन बेचने वाला राजेश पांडे गिरफ़्तार – NANDED TODAY NEWS
You are here
Home > Daily News > تم القبض على راجيش باندي لبيعه ألفي لقاح مزيفراجیش پانڈے کو دو ہزار جعلی ویکسین فروخت کرنے کے الزام میں گرفتار کیا گیا दो हज़ार नक़ली वैक्सीन बेचने वाला राजेश पांडे गिरफ़्तार

تم القبض على راجيش باندي لبيعه ألفي لقاح مزيفراجیش پانڈے کو دو ہزار جعلی ویکسین فروخت کرنے کے الزام میں گرفتار کیا گیا दो हज़ार नक़ली वैक्सीन बेचने वाला राजेश पांडे गिरफ़्तार

Spread the love

NANDED TODAY INDIA: 02,July,2021 कोरोना की महामारी बीमारी में सरकार ने नागरिकों की जान बचाने लिए नागरिकों की सुवस्त का ख्याल रखने के लिए वैक्सीन लगाने के आदेश जारी किये थे! देश के अलग अलग रजियों में वैक्सीन लगाने को लेकर डॉक्टरों एंव वैक्सीन बूथों पर अनेक समय तुत मैं होने जैसे हालात मीडिया के माध्यम से देखने और सुनने में आएं

डुबलीकेट वैक्सीन को लेकर मुंबई से ताज़ा जानकरी के अनुसार और देश के प्रसिद्ध हिंदी भास्कर न्यूज़ में छपी ख़बर के अनुसार मुंबई में 2 हजार से ज्यादा लोगों को फेक वैक्सीन लगाने वाले गिरोह के सरगना को पुलिस ने आखिरकार शुक्रवार को अरेस्ट कर लिया है। आरोपी की पहचान बारामती के रहने वाले राकेश पांडे के रूप में हुई है। राजेश पांडेय सोसाइटीज नमें जाकर पहले उनका विश्वास जीतात था और फिर पैसे लेकर फेक वैक्सीनेशन सेंटर का आयोजन करता था। अब तक मुंबई और ठाणे में फेक वैक्सीनेशन कैंप की 10 से ज्यादा FIR दर्ज हो चुकी है। अबतक इस केस में 12 लोगों को अरेस्ट किया जा चुका है।

मामले की जांच करने वाली मुंबई पुलिस का कहना है कि इस गोरखधंधे में कुछ हॉस्पिटल्स के शामिल होने के भी सबूत मिले हैं। पांडे मुंबई के अंधेरी में स्थित कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल का पूर्व कर्मचारी था। पांडेय सेल्स डिपार्टमेंट में काम करता था। इस कारण इस तरह के काम का उसे पुराना अनुभव है

जांच में सामने आया है कि किसी को शक न हो, इसलिए वह फेक वैक्सीनेशन कैंप के लिए अस्पताल की आधिकारिक ईमेल आईडी का इस्तेमाल करता था। हीरानंदानी का मामला सामने आने के बाद से पांडेय फरार हो गया था। हॉस्पिटल ने भी उसके बारे में जानकारी मिलते ही उसे सेवा से बर्खास्त कर दिया था।

पुलिस को जांच के दौरान राकेश पांडे के बारे में पता चला था। कई सोसाइटीज में हुए वैक्सीनेशन कैंप के दौरान उसके तस्वीरें भी CCTV कैमरों में कैद हुई थी। पुलिस ने उसके खिलाफ धोखाधड़ी समेत कई धाराओं में केस दर्ज किया है। कुछ देर में उसे मुंबई लाया जाएगा और बाद में पुलिस हिरासत में अदालत में पेश किया जाएगा।

30 मई को मुंबई की हीरानंदानी हाउसिंग सोसाइटी परिसर में 390 लोगों को कोवीशील्ड का टीका लगाया गया। हर डोज के लिए 1,260 रुपए लिए गए। सोसाइटी की ओर से कुल 4 लाख 91 हजार 400 रुपए का भुगतान किया गया। राजेश पांडे ने खुद को कोकिलाबेन अंबानी अस्पताल का प्रतिनिधि बताते हुए सोसाइटी कमेटी के सदस्यों से संपर्क किया था। इस अभियान का संचालन संजय गुप्ता ने किया, जबकि महेंद्र सिंह नाम के व्यक्ति ने सोसाइटी के सदस्यों से पैसा लिया था।

टीका लगने के बाद सोसाइटी के लोगों के मोबाइल पर किसी भी तरह का मैसेज नहीं आया। इसके अलावा टीका लगवाने के दौरान किसी को सेल्फी या फोटो खींचने की अनुमति नहीं दी गई। किसी को भी रिसीव्ड या सर्टिफिकेट नहीं दिया गया। 10-15 दिन बाद प्रमाण पत्र आए तो वे अलग-अलग अस्पतालों जैसे नानावटी, लाइफ लाइन, नेस्को BMC टीकाकरण केंद्र की ओर से जारी किए गए थे। इस मामले में संबंधित अस्पतालों से संपर्क किया तो उन्होंने सोसाइटी को टीके उपलब्ध कराने से इंकार किया। इसके बाद सोसाइटी के सदस्यों ने संदेह जताते हुए इस मामले में केस दर्ज करवाया था।

من أجل إنقاذ أرواح المواطنين في وباء مرض كورونا ، أصدرت الحكومة أوامر بتطبيق اللقاح للعناية بصحة المواطنين. لرؤية وسماع من خلال وسائل الإعلام ، مواقف مثل التواجد في الأطباء وأكشاك اللقاح عدة مرات لتطبيق اللقاح في مناطق مختلفة من البلاد.

وبحسب آخر المعلومات الواردة من مومباي بخصوص اللقاح المكرر ، ووفقًا للأنباء المنشورة في صحيفة باسكار الهندية الشهيرة للبلاد ، ألقت الشرطة القبض أخيرًا على زعيم عصابة يزيد عدد أفرادها على ألفي شخص في مومباي يوم الجمعة. تم التعرف على المتهم على أنه راكيش باندي ، من سكان باراماتي. اعتاد راجيش باندي كسب ثقتهم أولاً بالذهاب إلى المجتمعات ثم اعتاد على تنظيم مركز التطعيم الوهمي عن طريق أخذ المال. حتى الآن ، تم تسجيل أكثر من 10 تقارير معلومات عن معلومات الطيران في مومباي وثين لمعسكرات التلقيح الوهمية. وقد تم حتى الآن اعتقال 12 شخصًا في هذه القضية.

وتقول شرطة مومباي ، التي تحقق في القضية ، إنه تم العثور أيضًا على أدلة على تورط بعض المستشفيات في هذه الخدعة. كان باندي موظفًا سابقًا في مستشفى Kokilaben Dhirubhai Ambani الموجود في Andheri ، مومباي. اعتاد باندي العمل في قسم المبيعات. لهذا السبب لديه خبرة قديمة في هذا النوع من العمل.

كشفت التحقيقات أنه لا يوجد أي شك لدى أحد ، لذلك اعتاد على استخدام معرف البريد الإلكتروني الرسمي للمستشفى لمعسكر التطعيم الوهمي. كان باندي قد فرّ بعد أن برزت قضية حيرانانداني إلى الواجهة. كما قام المستشفى بفصله من الخدمة بمجرد حصوله على معلومات عنه.

تعرفت الشرطة على راكيش باندي أثناء التحقيق. خلال معسكر التلقيح الذي أقيم في العديد من المجتمعات ، تم التقاط صوره أيضًا بكاميرات الدوائر التلفزيونية المغلقة. سجلت الشرطة قضية ضده تحت أقسام مختلفة بما في ذلك الغش. وسيُحضر إلى مومباي في وقت ما ، وسيمثل أمام المحكمة في حجز الشرطة لاحقًا.

في 30 مايو ، تم تطعيم 390 شخصًا بـ CoveShield في مقر جمعية الإسكان Hiranandani في مومباي. تم تحميل 1،260 روبية لكل جرعة. تم دفع ما مجموعه 4 روبية لكح 91 ألف 400 من قبل المجتمع. اتصل راجيش باندي بأعضاء لجنة المجتمع ، واصفًا نفسه بأنه ممثل لمستشفى كوكيلابين أمباني. قاد هذه الحملة سانجاي جوبتا ، بينما أخذ شخص يدعى ماهيندرا سينغ أموالًا من أعضاء المجتمع.

بعد الحصول على اللقاح ، لم تكن هناك رسالة من أي نوع على الهاتف المحمول لأفراد المجتمع. بصرف النظر عن هذا ، لم يُسمح لأي شخص بالتقاط صور سيلفي أو صور أثناء التطعيم. لم يستلم أي شخص شهادة أو يتسلمها. بعد 10-15 يومًا ، تم إصدار الشهادات من مستشفيات مختلفة مثل Nanavati و Life Line و Nesco BMC Vaccination Centre. وعند الاتصال بالمستشفيات المعنية بهذا الأمر ، رفضوا تقديم اللقاحات إلى الجمعية. بعد ذلك ، سجل أعضاء الجمعية قضية في هذا الشأن تثير الشكوك.

کورونا کی وبا کے مرض میں شہریوں کی جانیں بچانے کے لئے ، حکومت نے شہریوں کی صحت کا خیال رکھنے کے لئے ویکسین لگانے کے احکامات جاری کیے تھے۔ میڈیا کے ذریعے دیکھنے اور سننے کے ل situations ، ملک کے مختلف علاقوں میں ویکسین لگانے کے ل many کئی بار ڈاکٹروں اور ویکسین بوتھس پر رہنے جیسے حالات۔

ممبئی سے نقل کی ویکسین کے حوالے سے تازہ ترین معلومات اور ملک کے مشہور ہندی بھاسکر نیوز میں شائع ہونے والی خبر کے مطابق ، بالآخر جمعہ کے روز پولیس نے ممبئی میں 2 ہزار سے زائد افراد کے گروہ کے سرغنہ کو گرفتار کرلیا۔ ملزم کی شناخت راکیش پانڈے کے نام سے ہوئی ہے ، جو بارامتی کا رہائشی ہے۔ راجیش پانڈے پہلے سوسائٹیوں میں جاکر ان کا اعتماد جیتتے تھے اور پھر رقم لے کر جعلی ویکسینیشن سنٹر کا انتظام کرتے تھے۔ جعلی ویکسی نیشن کیمپوں کے لئے ممبئی اور تھانہ میں اب تک 10 سے زیادہ ایف آئی آر درج کی جاچکی ہیں۔ اس معاملے میں اب تک 12 افراد کو گرفتار کیا جا چکا ہے۔

ممبئی پولیس ، جو اس معاملے کی تفتیش کررہی ہے ، کا کہنا ہے کہ اس چاک میں کچھ اسپتالوں کے ملوث ہونے کے بھی ثبوت ملے ہیں۔ پانڈے ممبئی کے اندھیری میں واقع کوکیلاબેન دھیر بھائی بھائی امبانی اسپتال کے سابق ملازم تھے۔ پانڈے محکمہ سیلز میں کام کرتا تھا۔ اسی وجہ سے اسے اس طرح کے کام کا پرانا تجربہ ہے۔

تفتیش سے انکشاف ہوا ہے کہ کسی کو کوئی شبہ نہیں ہے ، لہذا وہ جعلی ویکسی نیشن کیمپ کے لئے اسپتال کا آفیشل ای میل آئی ڈی استعمال کرتا تھا۔ ہیرانندانی کیس منظر عام پر آنے کے بعد پانڈے مفرور ہوگئے تھے۔ اس کے بارے میں اطلاع ملتے ہی اسپتال نے بھی اسے ملازمت سے برطرف کردیا تھا۔

پولیس کو تحقیقات کے دوران راکیش پانڈے کے بارے میں پتہ چل گیا۔ متعدد معاشروں میں لگائے گئے ویکسی نیشن کیمپ کے دوران ، ان کی تصاویر کو سی سی ٹی وی کیمروں میں بھی قید کیا گیا تھا۔ پولیس نے اس کے خلاف دھوکہ دہی سمیت مختلف دفعات کے تحت مقدمہ درج کرلیا ہے۔ کچھ دیر میں اسے ممبئی لایا جائے گا اور بعد میں پولیس تحویل میں عدالت میں پیش کیا جائے گا۔

30 مئی کو ، ممبئی میں ہیرانندانی ہاؤسنگ سوسائٹی کے احاطے میں 390 افراد کو کو شیلڈ سے ٹیکہ لگایا گیا تھا۔ ہر خوراک کے لئے 1،260 روپے وصول کیے گئے۔ سوسائٹی نے کل 4 لاکھ 91 ہزار 400 روپے ادا کیے۔ راجیش پانڈے نے سوسائٹی کمیٹی کے ممبروں سے رابطہ کیا تھا ، انہوں نے خود کوکیلابین امبانی اسپتال کا نمائندہ بتایا۔ یہ مہم سنجے گپتا نے چلائی تھی ، جبکہ مہیندر سنگھ نامی شخص نے سوسائٹی کے ممبروں سے رقم لی تھی۔

ویکسین لگانے کے بعد معاشرے کے لوگوں کے موبائل پر کسی قسم کا کوئی پیغام نہیں آیا۔ اس کے علاوہ ، کسی کو بھی ویکسینیشن کے دوران سیلفیز یا فوٹو لینے کی اجازت نہیں تھی۔ کسی کو سرٹیفکیٹ نہیں ملا یا موصول نہیں ہوا۔ 10-15 دن کے بعد سرٹیفکیٹ آئے ، انہیں ناناوتی ، لائف لائن ، نیسکو بی ایم سی ویکسینیشن سینٹر جیسے مختلف اسپتالوں نے جاری کیا۔ جب اس معاملے میں متعلقہ اسپتالوں سے رابطہ کیا گیا تو انہوں نے معاشرے کو ویکسین فراہم کرنے سے انکار کردیا۔ اس کے بعد سوسائٹی کے ممبروں نے اس معاملے میں شکوک و شبہات پیدا کرتے ہوئے مقدمہ درج کیا تھا۔

Total Page Visits: 593 - Today Page Visits: 3

Spread the love

Leave a Reply

Top