वर्तमान में आधुनिकता की होड़ के कारण बच्चो ने टी वी इंटरनेट को अपना साथी बनाया है। लोगो की जीवन शैली में काफी परिवर्तन हुआ है। देश में डिजिटल घुसपैठ के कारण बच्चो की जिंदगी में मानसिक व शारीरिक परिवर्तन को प्रभावित करने लगी है।

वर्तमान मे यू ट्यूब पर महिलाओ ने अपनी छवि ख़राब कर रखी है। घरो मे ख़ाली बैठी कुछ ऐसी महिलाये एक दूसरे को दिखावा करने के होड़ मे और अपने व्यूज बढ़ाने चक्कर मे घर के बैडरूम के आंतरिक द्रश्य भी वीडियो बना कर अपलोड कर देते है । अश्लील वस्त्र पहन कर नुमाइश करते हुए ,बेढंड तरीके से नाच करते हुए रील्स बना कर अपलोड कर देते है। जिससे ये महिलाये समाज मे अश्लीलता परोस रही है।
आज शिक्षा के क्षेत्र मे आधुनिक शैली के कारण बहुत परिवर्तन हुआ है। सरकार द्वारा ऑनलाइन शिक्षा को बढ़ावा देने के कारण माता पिता को ना चाहते हुए मोबाइल देना पड़ता है। रील्स को स्क्रॉल करते हुए बच्चों की नज़र पड़ ही जाती है।

आज बच्चों का सारा दिन टीवी नेट यू ट्यूब और सोसल मिडिया पर बीत जाता है । टी वी एवं नेट यू ट्यूब और सोसल मिडिया पर एडल्ट प्रोग्रामो का बच्चो के दिल और दिमाग पर बुरा प्रभाव पड़ता है। दिन मे कई कई बार देखने के कारण उनके अंतकरण में रच बस जाते है।
एडल्ट प्रोग्राम पश्चिमी संस्कृति के अंधानुकरण द्वारा बच्चो में उत्तेजना से मानसिकता को बढ़ावा देता है। कुछ विकृत लोग भी टी वी एवं नेट पर नारी की विरक्त छवि अंकित कर भारी मुनाफा कमाते है। जिसे देखने से बच्चो की मानसिकता को भी काफी हद तक प्रभावित करते है। शक्तिवर्धक दवाइया, सेनेटरी, नेपकिन्स, गर्भ निरोधक आदि बाते उसे समय से पहले ही वयस्क बना देते है। उन्हें देखकर वह प्रश्न पूछ बैठता है। उत्तर न मिलने पर वह नेट में गहराई में जाकर सर्च करता है। या अशील पुस्तकों का भी सहारा लेता है। जिससे उसका शारीरिक हनन होता है।
छोटे बच्चो द्वारा नेट पर अश्लील चीजों को देखने जैसी समस्याए भी उभर कर आ रही है। छोटे बच्चो के केस में स्कूल में वह टॉयलेट में अधिक जाते है। जहाँ वे अपने प्राइवेट पार्ट से खेलते है। मास्टरबेशन करते है। पोर्नोग्राफी देखकर उनमे एक्सपेरिमेंट की उत्सुकता बढ़ती है। सीखने की इच्छा पनपती है। ऐसे में सेक्स एजुकेशन जरुरी हो गया है।
टी वी व नेट ,यू ट्यूब और सोसल मिडिया पर परोसे जा रहे लगे दृश्य तथा ब्लू फ्लिमों ने तो बच्चो में मानसिक विकृतिया इस कदर पैदा कर दी है। बच्चे व किशोर यौन अपराधों की और आकर्षित हो रहे है। किशोरों में तो प्रतिशोध पोर्न के मामले बढ़ते जा रहे है। टॉयलेट में रिकॉर्ड छुपा कर रख देते है। बाद में डिजिटल डाटा परिवर्तित हुए उन क्षणों को मुफ्त पोर्न साइटों पर अपलोड कर देते है। कुछ बच्चे व किशोर फिल्मो को देखकर बलात्कार जैसे अपराधों की और आकर्षित हो रहे है।
AI के आने से भी कुछ मानसिक विकृति के लोग फोटो व वीडियो मे परिवर्तन करके एक दूसरे को नीचा दिखाने के लिए सामाजिक छवि ख़राब कर रहे है। जिससे इस तरह के भी आपराधिक मामले बढ़ रहे है।
असफल प्यार विकृति या ब्लैकमेलिंग की मंशा से प्रतिशोध पोर्न के मामले बढे है। मगर क़ानून न होने के कारण पीड़ितों को इन्साफ नहीं मिलता। फिलहाल प्रतिशोध पोर्न की अधिकतम सजा पांच साल है। लेकिन ज्यादातर मामलो में दोषियों को जमानत मिल जाती है। या नाबालिग होने के कारण कानून इन्हे माफ़ कर देता है।
बच्चो के इस रवैये पर माता पिता का रॉब भी नकारात्मक भूमिका निभाता है। समय के आभाव के कारण जबरदस्ती बच्चो को टी वी दिखा कर वे उन के स्वास्थ्य व भविष्य के साथ खिलवाड़ करते है। अब सयुंक्त परिवार नहीं रहे। जहाँ बच्चे अपने दादा दादी व अन्य सदस्य के साथ बिता सके या खेल सके। उनका साथ टी वी एवं नेट का ही रह जाता है।
इस स्थिति से निपटने के लिए माता पिता को अपने बच्चो के बिहेवियर पर भी बारीकी से नज़र रखना होगा। यदि हम अब भी न चेते तो हमारी सभ्यता सांस्कृति विलुप्त होने की पीड़ा को भी भोगना पड़ेगा। और बच्चों का भविष्य अंधारमय हो जायेगा। इन सब बातो के लिए कानून व सरकार को भी कड़े कानून बनाने होंगे। जहाँ एक नया संगठन बनाना होगा। जो टीवी ,यू ट्यूब ,सोसल मिडिया ,नेट पर बारीकी से नज़र बनाए रखे ,कि अश्लीलता व फूहड़ता की वीडियो को अपलोड करते ही उनकी पकड़ दारी करे। उन पर कार्रवाई करे। और कड़ी से कड़ी सजा प्रवधान करे।

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